खरगोन में 200 से ज्यादा तोतों की मौत, बर्ड फ्लू नहीं फूड पॉइजनिंग कारण
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खरगोन में 200 से अधिक तोतों की मौत, बर्ड फ्लू की आशंका खारिज, पशु चिकित्सा विभाग ने फूड पॉइजनिंग को बताया कारण।
नर्मदा नदी किनारे 72 घंटे में मृत मिले तोते, प्रशासन और वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी।
जहरीले खाद्य पदार्थ या कीटनाशकों के सेवन से पक्षियों की मौत की आशंका, स्थानीय लोगों में चिंता।
खरगोन/ मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में नर्मदा नदी के किनारे अचानक बड़ी संख्या में तोतों की मौत ने लोगों को चौंका दिया है। बीते 72 घंटों में करीब 200 से अधिक तोते मृत पाए गए, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों की सूचना पर प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग सक्रिय हुआ। प्रारंभिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की आशंका को खारिज करते हुए फूड पॉइजनिंग को मौत की वजह बताया गया है।
खरगोन जिले के नर्मदा तटवर्ती क्षेत्रों में बीते कुछ दिनों से लोग बड़ी संख्या में मृत तोते देख रहे थे। ये तोते खेतों, पेड़ों के नीचे और नदी किनारे पड़े मिले, जिसके बाद स्थानीय निवासियों में दहशत का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मृत पक्षियों को एकत्र कर जांच शुरू की गई।
प्रशासन द्वारा मृत तोतों के सैंपल लेकर पोस्टमार्टम कराया गया। पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक जी.एस. सोलंकी ने बताया कि जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि इन तोतों की मौत बर्ड फ्लू या किसी संक्रामक बीमारी से नहीं हुई है। प्रारंभिक निष्कर्षों के अनुसार, मौत का कारण फूड पॉइजनिंग है। संभावना जताई जा रही है कि तोतों ने किसी जहरीले खाद्य पदार्थ या रासायनिक दानों का सेवन किया होगा।
अधिकारियों ने बताया कि नर्मदा किनारे कुछ स्थानों पर कृषि गतिविधियां होती हैं, जहां कीटनाशकों या जहरीले पदार्थों के संपर्क में आने से यह घटना हुई हो सकती है। फिलहाल पूरे इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई है और लोगों को मृत पक्षियों को हाथ न लगाने की सलाह दी गई है। वन विभाग द्वारा क्षेत्र की निगरानी की जा रही है ताकि आगे किसी और पक्षी या वन्यजीव को नुकसान न पहुंचे। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि यदि आवश्यक हुआ तो विस्तृत जांच भी कराई जाएगी।
खरगोन में हुई यह घटना पर्यावरण और वन्यजीव सुरक्षा के प्रति गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि बर्ड फ्लू जैसी महामारी की आशंका से राहत मिली है, लेकिन फूड पॉइजनिंग की वजह ने रासायनिक उपयोग और पर्यावरण संतुलन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।